संसद के विशेष सत्र में आधी रात तक संग्राम: डिजिटल गवर्नेंस बिल ध्वनिमत से पारित, गृहमंत्री बोले- "जनता का हक सीधे खाते में"
संसद के विशेष सत्र में आधी रात तक चली मैराथन बहस के बाद ऐतिहासिक डिजिटल गवर्नेंस विधेयक ध्वनिमत से पास। सरकारी दफ्तरों में बिचौलियों का खेल होगा खत्म, 100% पेपरलेस सेवाओं की शुरुआत।
संसद भवन के बाहर प्रेस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री और विपक्षी नेता।
नई दिल्ली: संसद के वर्तमान सत्र के दौरान देश की डिजिटल अवसंरचना और लोक कल्याणकारी योजनाओं को सीधे नागरिकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक युगांतरकारी विधेयक दोनों सदनों में प्रस्तुत किया गया।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाना, बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना और गांव-गांव तक 100% पेपरलेस व समयबद्ध नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने भी सकारात्मक सुझाव दिए और इस बात पर सहमति जताई कि तकनीकी सुधारों से देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सीधा लाभ मिलना चाहिए।
विधेयक की मुख्य विशेषताएं:
- सभी सरकारी अनुमतियों और प्रमाणपत्रों के लिए एकल डिजिटल खिड़की व्यवस्था।
- नागरिकों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय कड़ा प्रोटोकॉल।
- भ्रष्टाचार निवारण और जवाबदेही तय करने हेतु ऑटोमेटेड ऑडिट ट्रेल।
- ग्रामीण क्षेत्रों में 50,000 नए डिजिटल सेवा केंद्रों की स्थापना।
सदन में बोलते हुए आईटी मंत्री ने कहा, "यह कानून 21वीं सदी के आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करेगा। अब किसी भी आम नागरिक को अपने जायज काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।"
विधेयक पर देर रात तक चली बहस के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह देश भर में आगामी वित्त वर्ष से प्रभावी हो जाएगा।
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संसद में हुई यह चर्चा लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाती है। जनता हेडलाइन की यह रिपोर्ट बहुत विस्तृत और निष्पक्ष है।
डिजिटल सेवाओं में साइबर फ्रॉड की रोकथाम सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।